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उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे प्रदेश के युवा,डिजिटल गर्वनेंस और रोजगार के अवसरों का हुआ सृजन,प्रतिष्ठित संस्थानों के जरिये युवाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण।

राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार के निरंतर प्रयासों से आज प्रत्येक विधानसभा और तहसील स्तर पर उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित हो चुके हैं, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए शिक्षा के नए द्वार खुले हैं। बीते 25 वर्षों में उच्च शिक्षा को डिग्री तक सीमित न रखकर इसे रोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ा गया है। परिणामस्वरूप, प्रदेश के युवाओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, बल्कि वे अपने सपनों को भी साकार कर रहे हैं।

 

*ज्ञान के प्रकाश का हुआ विस्तार*

राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा को सर्वसुलभ कराने के सतत और सकारात्मक प्रयास किये हैं। यही वजह है कि राज्य स्थापना के समय प्रदेश में जहां 03 राज्य विश्वविद्यालय और 31 शासकीय महाविद्यालय अस्तित्व में थे। वर्तमान में राज्य में 05 राज्य विश्वविद्यालयों सहित कुल 11 राजकीय विश्वविद्यालय तथा 118 महाविद्यालय संचालित किया जा रहे हैं। इसके अलावा 31 निजी विश्वविद्यालय व 238 निजी महाविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।

 

*छात्र संख्या बढ़ी तो जीईआर में भी हुई वृद्धि*

राज्य सरकार की ठोस नितियों से विगत 25 वर्षों में राज्य में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में खास इजाफा हुआ है। राज्य गठन के समय उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों की संख्या लगभग 01 लाख थी जो वर्तमान में बढ़कर 5 लाख हो चुकी है। राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय परिसरों में अध्ययनरत 2.54 लाख छात्रों में से 1.53 लाख छात्राएं अध्ययनरत है जोकि कुल छात्र संख्या के 60 फीसदी से अधिक है। यानि उच्च शिक्षा ग्रहण करने में बालिकाएं भी पीछे नहीं हैं। सकल नामांकन अनुपात की बात करें तो राज्य गठन पर यह अनुपात 31.1 प्रतिशत था जो बढ़कर 41.8 प्रतिशत हो चुका है। जो राष्ट्रीय अनुपात से अधिक है।

 

*संसाधन सम्पन्न हुये उच्च शिक्षण संस्थान*

राज्य सरकार ने विगत 25 वर्षों में युवाओं को गुणात्मक उच्च शिक्षा सुलभ कराने के दृष्टिगत आधारभूत सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया। जिसके चलते 118 महाविद्यालयों में 98 महाविद्यालयों के अपने भवन हैं जबकि शेष के निर्माणाधीन हैं। छात्रों को 40 छात्रावास की भी सुविधाएं सुलभ की है, जिसमें से 29 महिला छात्रावास हैं। भारत सरकार के पीएम उषा योजना के तहत रूपये 100 करोड़ के अनुदान से कुमाऊं विश्वविद्यालय को मेरू (मल्टी डिस्पिलीनरी एजुकेशन रिसर्च यूनिवर्सिटी) के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

*कार्मिकों की कमी हुई दूर*

उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्मिकों की कमी दूर की गई। वर्ष 2000 में शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों के कुल 918 तथा शिक्षणेत्तर कार्मिकों कुल 795 पद सृजित थे। वर्तमान में प्राचार्यों एवं शिक्षकों के कुल 2351 तथा शिक्षणेत्तर कार्मिकों के 1036 पद सृजित हैं। विगत पांच वर्षों में सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाते हुये शिक्षकों के कुल 1059 तथा शिक्षणेत्तर संवर्ग के कुल 290 पदों पर भर्ती की। इसके अलावा शत-प्रतिशत महाविद्यालयों में प्राचार्यों की तैनाती भी की। जिससे महाविद्यालयों में शैक्षिणक व प्रशासनिक गतिविधियों में सुधार हुआ।

 

*शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग पर फोकस*

सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों को रैंकिंग पर फोकस करने को कहा है। वर्ष 2017 के पश्चात 03 राज्य विश्वविद्यालय, 06 निजी विश्वविद्यालय, 02 डीम्ड विश्वविद्यालय, 45 शासकीय महाविद्यालय, 11 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय एवं 06 निजी महाविद्यालय नैक द्वारा प्रत्यायनित हो चुके हैं। भविष्य में इनकी संख्या में और इजाफा होगा। इसके अलावा एनआईआरएफ रैंकिंग के लिये भी शिक्षण संस्थाओं को बेहतर प्रदर्शन करने को कहा गया है।

 

*शोध पत्रों व पेटेंट की बढ़ी संख्या*

वर्ष 2001 में राज्य में स्कोपस इंडेक्स्ड शोध प्रकाशनों की संख्या 389 थी जो वर्तमान में बढ़कर 12430 हो गई है। इसी प्रकार वर्ष 2021 में कुल पेटेंट फाइल की संख्या 268 थी जिसकी संख्या आज 417 हो गई है। राज्य में शोधों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिये विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं भी संचालित की जा रही है। जिसके तहत शोधार्थियों को छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही है।

 

*एनईपी-2020 का ठोस क्रियान्वयन*

उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल है जिसने सर्वप्रथम नई शिक्षा नीति-2020 को लागू किया और नीति के तहत कैरिकुलम अपग्रेडेशन एवं पाठ्यक्रम संरचनात्मक सुधार किये और इसे समस्त सम्बद्धता विश्वविद्यालयों में लागू किया। इसके साथ ही समस्त विश्वविद्यालयों में मल्टीपल एंट्री व एक्जिट सुविधा के साथ ही एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट अनिवार्य कर दिया गया है। अभी तक 26 लाखा 68 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं की एबीसी आईडी निर्मित कर दी गई है।

 

*शिक्षकों के प्रशिक्षण पर फोकस*

संकाय गुणवत्ता संर्वधन के लिय राज्य सरकार ने पिछले वर्षों में बड़े प्रयास किये हैं। शिक्षकों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईएससी, आईआईएसईआर में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अभी तक इन संस्थानों से 93 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा ईडीआईआई अहमदाबाद में 185 शिक्षकों को उद्यमिता प्रशिक्षण दिया गया। 76 प्राचार्य एवं शिक्षकों को आईआईएम काशीपुर से लीडरशिप प्रशिक्षण दिया गया। जबकि 64 शिक्षकों को इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड में प्रशिक्षण दिया गया। वर्ष 2020 से उत्कृष शिक्षकों को प्रोत्साहित करने हेतु भक्तदर्शन उच्च शिक्षा गौरव पुरस्कार योजना चलाई जा रही है। जिसके तहत अभी तक 12 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

 

*छात्र-छात्राओं को मिल रहा प्रोत्साहन*

उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। उनको विभिन्न छात्रवृत्तियों का जहां लाभ दिया जा रहा है वहीं उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों, ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री विद्यार्थी शैक्षिक भारत दर्शन योजना के तहत 270 छात्रों को आईआईएससी, बीएचयू, जेएनयू सहित विभिन्न राज्यों के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री मेधावी छात्र पुरस्कार, मुख्यमंत्री उच्च शिक्ष्ज्ञा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त शोधार्थी छात्रों को भी छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।

 

*छात्रों के स्किल डेवलपमेंट पर फोकस*

प्रदेश के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गुणवत्तपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। इसके लिये नैसकॉम, इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड एवं बाधवानी फाउंडेशन की सहायता से छात्रों को कौशलपकर कार्यक्रम उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इसके अलावा अमृता विश्वविद्यापीठम विश्वविद्यालय की सहायता से 40 महाविद्यालयों को वर्चुअल लैब की सुविधा दी जा रही है। आईआईटी कानपुर के सहयोग से छात्रों को निःशुल्क कोचिंग सुविधा प्रदान की जा रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सहायता से प्रदेश के 6441 छात्रों को वित्तीय एवं बैंकिंग क्षेत्र का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

 

*उच्च शिक्षण संस्थानों का डिजिटलाइजेशन*

प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है। वर्तमान में समर्थ पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रवेश, परीक्षा, छात्रवृत्ति, अवकाश, उपस्थिति आदि की प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा रही है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में 79201 छात्रों को समर्थ के माध्यम से ऑनलाइन प्रवेश दिया गया है। इसके अलावा प्रदेश के समस्त छात्र-छात्राओं को डिजीलॉकर के माध्यम से डिग्री प्रदान की जा रही है, जिससे छात्र-छात्राएं कहीं से भी अपनी डिग्री ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं।

 

*रोजगार के अवसरों का सृजन*

उच्च शिक्षा विभाग के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में उद्यमिता, नवाचार व स्टार्ट अप को देवभूमि उद्यमिता योजना के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है। छात्रों द्वारा लगभग 1000 छात्र उद्यम एवं स्टार्ट अप शुरू किये गये हैं। जिसमें 333 छात्र स्वयं का उद्यम कर आर्थिक लाभ उठा रहे हैं।

राज्य सरकार उच्च शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे जीवन, रोजगार और समाज से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। हमारा उद्देश्य है कि शिक्षा के माध्यम से युवाओं को न केवल ज्ञान मिले, बल्कि वह आत्मनिर्भर भी बनें। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, अवसरों में समानता और प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

3 Comments

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