Search for:
  • Home/
  • उत्तराखंड/
  • उत्तराखंड का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर बन गया बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा का केंद्र

उत्तराखंड का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर बन गया बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा का केंद्र

अन्वेषण का केंद्र बनता राज्य का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अंधकार से शिक्षा के उजाले की ओर बच्चों का सशक्त पुनर्वास

अब तक 154 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े, 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू

देहरादून | 18 जनवरी

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित राज्य का प्रथम आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC) अब केवल पुनर्वास का केंद्र नहीं, बल्कि शैक्षणिक शोध, सामाजिक अध्ययन और मानवीय संवेदनाओं के सशक्त प्रयोग का उदाहरण बनता जा रहा है। भिक्षावृत्ति, बालश्रम और कूड़ा बीनने जैसी अमानवीय परिस्थितियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों का यहां माइंड रिफॉर्मेशन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राएं इस केंद्र का भ्रमण कर न केवल सामाजिक शोध कार्य कर रहे हैं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

इसी क्रम में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र यादव के नेतृत्व में इंटेंसिव केयर सेंटर का भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने बच्चों से संवाद स्थापित किया और पुनर्वास की इस अभिनव प्रक्रिया को नजदीक से समझा।

बच्चों का आत्मीय स्वागत, आत्मविश्वास की सशक्त झलक

भ्रमण के अवसर पर ICC में रह रहे बच्चों ने अतिथियों का स्वयं के हाथों से बनाए गए स्वागत कार्ड और सुंदर सांस्कृतिक नृत्य के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया। इस सहभागिता से बच्चों में रचनात्मकता, प्रस्तुति कौशल, आत्मविश्वास और टीमवर्क के सकारात्मक विकास की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

यह पहल समाज और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवेदनशील साझेदारी का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।

सामाजिक पुनर्वास का प्रभावी मॉडल

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है। यहां बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेलकूद, व्यायाम, मनोरंजन और काउंसलिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से मानसिक रूप से सशक्त किया जा रहा है।

सड़कों पर बिखरे बचपन से भिक्षा का कटोरा छीनकर शिक्षा की कलम सौंपने का यह मानवीय प्रयास अब ठोस और प्रेरणादायी परिणाम दे रहा है। आज यह केंद्र समाज के सबसे वंचित बच्चों के लिए आशा की किरण बन चुका है।

27 बच्चों को मिला विद्यालय में प्रवेश

शनिवार को इंटेंसिव केयर सेंटर से 27 बच्चों को विभिन्न सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया।
अब तक:

  • 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू

  • 154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया

दिसंबर 2024 से संचालित अभियान

दिसंबर 2024 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को रखा गया, जिनमें—

  • 83 बच्चे भिक्षावृत्ति से

  • 117 बच्चे कूड़ा बीनने से

  • 67 बच्चे बालश्रम से

रेस्क्यू किए गए हैं।

बच्चों के आवागमन हेतु विशेष कैब सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। जिलाधिकारी द्वारा इस संपूर्ण कार्यक्रम की नियमित और व्यक्तिगत मॉनिटरिंग की गई, जिसके उपरांत बच्चों को चरणबद्ध तरीके से विद्यालयों में दाखिला दिलाया गया।

जिलाधिकारी की भावुक अपील

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा—

“शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया—

“भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन तक निरंतर जारी रहेगा। रुकना कोई विकल्प नहीं है।”