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उत्तराखंड: 79 जर्जर स्कूल भवन घोषित निष्प्रोज्य, ध्वस्तीकरण हेतु ₹1 करोड़ स्वीकृत

Uttarakhand Declares 79 Dilapidated School Buildings Unsafe, Demolition Begins | Children Safety Priority

वर्षों से जर्जर स्कूल भवन पहली बार घोषित निष्प्रोज्य

76 जोखिमपूर्ण विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज, ₹1 करोड़ स्वीकृत

मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश: नौनिहालों की जान से कोई समझौता नहीं

डीएम की सख्ती से 10 दिन में सामने आई 100 जर्जर स्कूल भवनों की रिपोर्ट

देहरादून, 18 जनवरी।
जनपद में वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवनों को लेकर जिला प्रशासन ने पहली बार ठोस, निर्णायक और समयबद्ध कार्रवाई शुरू की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि नौनिहालों के जीवन से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जिलाधिकारी की कड़ी निगरानी और सख्ती का ही परिणाम है कि महज 10 दिनों के भीतर 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्राप्त हुई। रिपोर्ट प्रस्तुत करने में देरी पर डीएम ने संबंधित विभागों के प्रति सख्त रुख अपनाया था, जिसके सकारात्मक और त्वरित परिणाम सामने आए।

₹1 करोड़ स्वीकृत, ध्वस्तीकरण प्रक्रिया को गति

जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को पूर्ण एवं आंशिक रूप से निष्प्रोज्य विद्यालय भवनों के आंगणन (एस्टिमेट) तैयार करने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि ध्वस्तीकरण और सुरक्षा संबंधी कार्यों में कोई विलंब न हो।

79 विद्यालय पूर्णतः निष्प्रोज्य घोषित

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जनपद में कुल 79 विद्यालयों के भवन पूर्णतः निष्प्रोज्य पाए गए हैं, जिनमें

  • 13 माध्यमिक विद्यालय

  • 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।

इनमें से 63 विद्यालयों में शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर दी गई है, जबकि 16 विद्यालयों में शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त

  • 17 विद्यालय आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं,

  • 8 विद्यालयों में ध्वस्तीकरण की आवश्यकता नहीं पाई गई है।

पहले वैकल्पिक व्यवस्था, फिर ध्वस्तीकरण

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि

  • पूर्णतः निष्प्रोज्य भवनों में तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

  • जिन विद्यालयों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था अभी नहीं है, वहाँ पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर उसके बाद ध्वस्तीकरण किया जाएगा।

  • आंशिक निष्प्रोज्य भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुरूप मरम्मत एवं प्रतिबंधात्मक उपाय लागू किए जाएंगे।

डीएम का स्पष्ट संदेश

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि

“बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई विषय नहीं है। किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण संचालित नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।”