मुरादाबाद में खुला जीएसटी फर्जीवाड़े का राज, दिल्ली और गाजियाबाद की फर्में रडार पर
राज्य कर विभाग की सचल टीमों द्वारा हाल ही में की गई धरपकड़ ने कर चोरी और फर्जीवाड़े के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस पूरी जांच प्रक्रिया से यह महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि दिल्ली और गाजियाबाद क्षेत्र से जुड़े कई कारोबारी और संस्थान जीएसटी नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद से कर चोरी करने वाले कारोबारियों में हड़कंप मच गया है और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

मुरादाबाद में सचल इकाइयों की छापेमारी से खुला मामला
कुछ दिन पहले राज्य कर विभाग की सचल इकाइयों ने मुरादाबाद में औचक निरीक्षण और छापेमारी करते हुए तीन संदिग्ध फर्मों को धर दबोचा था। इस शुरुआती धरपकड़ और उसके बाद की गई गहन छानबीन के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी चौंका दिया। जांच में यह बात स्पष्ट हुई कि राजधानी दिल्ली की पचास से अधिक फर्में सिर्फ और सिर्फ जीएसटी चोरी करने के नापाक इरादे से विभिन्न प्रकार के माल की आपूर्ति कर रही थीं। इसके विपरीत, गाजियाबाद की कई फर्में इन फर्जी लेन-देन के माध्यम से माल की केवल बोगस खरीद दिखाने का काम कर रही थीं। इन दोनों शहरों की फर्मों की यह मिलीभगत कर चोरी के एक सुनियोजित षड्यंत्र को दर्शाती है।
अन्य विभागों को दी गई सूचना और तेज हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को पूरी तरह समझते हुए राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा के एडिशनल कमिश्नर आरए सेठ ने मीडिया को इस कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में हुई इस महत्वपूर्ण कार्रवाई और खुलासे के संबंध में गाजियाबाद के सीजीएसटी और एसजीएसटी के वरिष्ठ अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर पूरी सूचना दे दी गई है।
मुरादाबाद में सामने आए इन तथ्यों और छापों के आधार पर अब गाजियाबाद में भी संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता बढ़ा दी गई है। कर अपवंचन और जीएसटी चोरी की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से गाजियाबाद में विभाग की तरफ से अब सघन स्तर पर छापेमारी और जांच अभियानों की शुरुआत कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की सख्त और समन्वित कार्रवाई से फर्जी बिलिंग के जरिए सरकारी राजस्व को चूना लगाने वाले लोगों पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सकेगी। इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और फर्मों की संलिप्तता की जांच का सिलसिला अभी भी लगातार जारी है, जिससे आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना बनी हुई है।
