सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर और चुनाव आयोग से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई बढ़ाई आगे
उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और एसआईआर प्रक्रिया के विरुद्ध प्रस्तुत की गई विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई अभी स्थगित कर दी है। इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर-तरीकों, कथित तौर पर अकेले लिए गए निर्णयों और फॉर्म 6 में संशोधन से संबंधित मामलों पर आयोग को नोटिस जारी किया गया है। इस विषय पर अगली सुनवाई दीपावली के अवकाश के पश्चात सत्रह नवंबर के आसपास होने की संभावना जताई गई है।

याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर हेतु मिला अवसर
न्यायालय में कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता राकेश सिंह का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने जजों को अवगत कराया कि निर्वाचन आयोग का हलफनामा उन्हें सुनवाई से ठीक एक रात पूर्व ही मिला है। इसके चलते, उस पर अपना जवाब तैयार करने के वास्ते समय की दरकार थी। पीठ ने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दस दिन का समय दे दिया है।
निर्वाचन आयोग का हलफनामा और फॉर्म 6 संबंधी विवाद
मुख्य चुनाव आयुक्त तथा आयोग के अन्य निर्णयों के विरोध में दायर याचिकाओं के संदर्भ में निर्वाचन आयोग ने दो सौ अड़तालीस पृष्ठों का विस्तृत प्रत्युत्तर दाखिल किया है। आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त भानु प्रकाश येतुरी के माध्यम से प्रस्तुत किए गए हलफनामे में एसआईआर प्रक्रिया का जोरदार समर्थन किया गया है। आयोग का यह दावा है कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के वास्ते प्रयुक्त होने वाले फॉर्म 6 में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। इसके विपरीत, राज्य सभा सांसद डोला सेन द्वारा प्रस्तुत एक नवीन याचिका पर भी न्यायालय ने नोटिस जारी किया है, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 6 में संशोधन किया गया था।
विपक्षी दलों और नेताओं की मांगें
शीर्ष अदालत के समक्ष इस प्रकरण से जुड़ी अनेक याचिकाएं विचाराधीन हैं। इनमें लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं की वह याचिका भी सम्मिलित है, जिसके माध्यम से निर्वाचन आयोग के कामकाज में कथित कमियों को उजागर करते हुए वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित किए जाने की मांग उठाई गई है। इन याचिकाओं का मुख्य आधार यह है कि कई अहम फैसले आपसी सहमति के बिना अकेले लिए गए थे।
