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केरलम मर्सिडीज हादसा: पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया लीपापोती का गंभीर आरोप

केरलम मर्सिडीज हादसा: पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया लीपापोती का गंभीर आरोप

केरलम के कोच्चि में एक न्यायाधीश के नाबालिग बेटे द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार ने एक स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया है। परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है, जबकि पुलिस ने प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 सहित कई कड़ी धाराएं जोड़ दी हैं।

केरलम मर्सिडीज हादसा: पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया लीपापोती का गंभीर आरोप

नाबालिग के दावे की खुली पोल

हादसे के तुरंत बाद आरोपी नाबालिग ने दावा किया था कि उसने पहली बार गाड़ी चलाई है और यूट्यूब वीडियो देखकर ड्राइविंग सीखी है। हालांकि, पुलिस जांच और उसके सोशल मीडिया अकाउंट से यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। दुर्घटना से पहले उसका एक सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट था, जिस पर वह तेज रफ्तार ड्राइविंग से जुड़े वीडियो साझा करता था। सूत्रों के अनुसार, एक वीडियो में वह उसी मर्सिडीज कार को 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाते नजर आया था। घटना के तुरंत बाद उसके अकाउंट के सभी वीडियो हटा दिए गए और प्रोफाइल को प्राइवेट कर दिया गया।

परिवार का गुस्सा और जमानत पर सवाल

पुलिस के अनुसार, रविवार तड़के करीब 2:20 बजे जब यह हादसा हुआ, तब कार की गति लगभग 104 किलोमीटर प्रति घंटा थी। हादसे के बाद नाबालिग को हिरासत में लिया गया, लेकिन कुछ ही मिनटों में उसे जमानत मिलने पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतक पिछले 30 वर्षों से स्ट्रीट फूड की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था और वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। रात का काम खत्म कर घर लौटते समय इस लग्जरी सेडान ने उसके दोपहिया वाहन को कुचल दिया।

गाड़ी में अन्य लोगों के मौजूद होने का दावा

मृतक के बच्चों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में जज और पुलिस मिलकर आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। परिजनों का दावा है कि हादसे के समय कार में चार लोग सवार थे, जिनमें से तीन टक्कर के तुरंत बाद वहां से भाग गए। पीड़ित परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि थाने में इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई और उन्होंने मांग की कि वाहन के पंजीकृत मालिक होने के नाते न्यायाधीश को भी मामले में सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए। परिवार अब न्याय के लिए कानूनी कदम उठाने और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की तैयारी कर रहा है।