मां की थकान दूर करने के लिए 12 साल के बच्चे ने कबाड़ से बनाए रोबोटिक उपकरण
केरल के एक 12 वर्षीय स्कूली छात्र लेविन पॉलोज ने अपनी मां के घरेलू कामकाज का बोझ कम करने के लिए बेकार पड़ी चीजों से कई अनोखे रोबोटिक उपकरण और ऑटोमेटेड गैजेट तैयार किए हैं। पारंपरिक परिवारों में बच्चों का अपनी मां के प्रति प्यार अक्सर छोटे-छोटे कामों में झलकता है, लेकिन इस युवा छात्र ने इसे एक नया आयाम दिया है। अपनी मां की रोजमर्रा की थकान को दूर करने के लिए लेविन ने बिना किसी महंगे बजट या आधुनिक लैब के घर को ही एक वर्कशॉप में बदल दिया।

कबाड़ और साधारण चीजों से तैयार किए उपकरण
लेविन ने कार्डबोर्ड, पुराने तारों, इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों, छोटी इलेक्ट्रिक मोटरों, धागों और प्लास्टिक के कचरे का उपयोग करके कई बेहतरीन घरेलू उपकरण बनाए हैं। उनके इन नवाचारों में ऑटोमेटेड फूड स्ट्रिरर, रोटी मेकर, रोबोटिक फ्लोर क्लीनर, वाटर और वेस्ट असिस्टेंट, कार्डबोर्ड ह्यूमनॉइड और रिमोट-कंट्रोल्ड कर्टेन मूवर शामिल हैं। इन उपकरणों की मदद से उनकी मां को रसोई के काम और घर की साफ-सफाई में काफी राहत मिली है।
सोशल मीडिया पर छाई कहानी और मिला सम्मान
लेविन अपने काम और उसके पीछे की पूरी प्रक्रिया को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हैं, जहां लोग उनकी मेहनत और गलतियों से सीखने की ललक को काफी पसंद कर रहे हैं। उनके इस अनोखे प्रयास और जुझारूपन ने प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इस युवा इनोवेटर को सम्मानित किया और सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतरीन ऑटोमेशन उपकरण तैयार करने के लिए उनकी जमकर सराहना की।

इंजीनियरिंग और संवेदनशीलता का अनूठा मेल
यह कहानी दर्शाती है कि इंजीनियरिंग केवल एक अकादमिक विषय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनों की देखभाल करने और उनकी तकलीफों को कम करने का एक प्रभावी माध्यम भी बन सकती है। बच्चों को यदि अपने आसपास के लोगों की परेशानियों को देखकर उनके समाधान के लिए प्रेरित किया जाए, तो उनकी संवेदनशीलता और हमदर्दी बेहतरीन आविष्कारों में बदल सकती है।
