टिहरी गढ़वाल का पंचवेली कंठा ट्रेक अपनी पहचान और विकास की राह जोह रहा है
टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में स्थित पंचवेली कंठा ट्रेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के बावजूद अभी तक उचित पहचान का इंतजार कर रहा है। बूढ़ाकेदार और घuttu क्षेत्र से होकर गुजरने वाला यह ट्रेक प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए एक रोमांचक अनुभव प्रदान करता है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी इसकी राह में बड़ी बाधा बनी हुई है।

प्राकृतिक और धार्मिक महत्व
इस ट्रेक के दौरान फैले हुए विशाल घास के मैदान, ऊंचे पहाड़ और ठंडी हवाएं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। मौसम बदलने के साथ यहां का नजारा भी बदलता रहता है, जहां कभी घना कोहरा पूरे क्षेत्र को ढंक लेता है तो कभी साफ मौसम में गंगी, सहस्त्रताल, खतलिंग ग्लेशियर और ऊंचे पहाड़ी गांवों के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा, प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यह मार्ग कभी चारधाम यात्रा का हिस्सा हुआ करता था। आज भी यहां धार्मिक और कांवर यात्रा के यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे इसकी प्राचीन परंपराएं जीवित हैं।
आवास और स्थानीय संस्कृति
इस दूरदराज के इलाके में यात्रियों के ठहरने के लिए काली कमली की धर्मशाला, वन विभाग के विश्राम गृह और स्थानीय चरवाहों की झोपड़ियां मौजूद हैं। इसके अलावा, वन गूर्जरों की डेयरियां इस हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक जीवनशैली और लोक संस्कृति की झलक पेश करती हैं।
विकास की आवश्यकता और रोजगार के अवसर
पर्यटन जानकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में सुरक्षित ट्रेकिंग मार्गों, विश्राम स्थलों, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सूचना संकेतक, मौसम की चेतावनियां और प्रशिक्षित स्थानीय गाइड सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं। इस क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, जिससे होमस्टे, पोर्टर और स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
पर्यावरण संरक्षण और नई पहल
हिमालयी घास के मैदानों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर देना भी उतना ही आवश्यक है। प्लास्टिक नियंत्रण, सीमित पर्यटन और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण कार्यों के जरिए यहां की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखा जा सकता है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) वरुणा अग्रवाल ने बताया कि घंटाकर्ण स्व-सहायता समूह को इस ट्रेक पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक परियोजना सौंपी गई है, जिसके तहत पर्यटकों को यात्रा कराने और वहां रात्रि विश्राम की सुविधा दी जाएगी।
