ग्रेटर नोएडा की अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में सुनाई सात साल की सजा
ग्रेटर नोएडा की एक अदालत ने अपहरण और दुष्कर्म के एक मामले में फैसला सुनाते हुए शाहजहांपुर निवासी कुलदीप को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को सात साल के कारावास की सजा सुनाई है और साथ ही पंद्रह हजार रुपये का कुल जुर्माना भी लगाया है। इस कानूनी कार्रवाई के तहत यदि दोषी जुर्माना राशि जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त समय जेल में बिताना होगा।

वर्ष 2025 में दर्ज हुआ था मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2025 का है, जब नोएडा एक्सप्रेसवे थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। करीब ग्यारह साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद अब अदालत ने इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया है। अदालत में चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की तरफ से दलीलें दी गईं।
अदालत में पक्षों की दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की तरफ से अलग-अलग मांगें रखी गईं। बचाव पक्ष के वकीलों की ओर से अदालत से कम सजा दिए जाने का आग्रह किया गया था। वहीं दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत में आरोपी के लिए अधिक से अधिक कठोर सजा की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने धाराओं के तहत सजा तय की।
आईपीसी की धाराओं के तहत सजा और जुर्माना
अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यदि यह जुर्माना समय पर जमा नहीं किया जाता है, तो दोषी को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, आईपीसी की धारा 366 के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर तीन साल के कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इस धारा के तहत भी जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में एक महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान तय किया गया है, जिससे कुल जुर्माना पंद्रह हजार रुपये बनता है।
