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मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के उपयोग पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक

मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के उपयोग पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक

भारतीय निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-7 के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। आयोग द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब इस फॉर्म के थोक में आवेदन नहीं दिए जा सकेंगे। कर्नाटक सहित कई राज्यों में एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 प्रस्तुत किए जाने के बाद विवाद सामने आया था, जिसके मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के उपयोग पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक

नए नियमों के तहत तय की गई सीमा

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियों के समय अब एक व्यक्ति केवल दस फॉर्म-7 से जुड़े आवेदन ही प्रस्तुत कर पाएगा। इसके अलावा, मतदाता सूची के सामान्य पुनरीक्षण के कार्य के दौरान एक महीने में कोई भी व्यक्ति केवल पांच फॉर्म-7 ही जमा कर सकेगा। गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले इस तरह के आवेदनों की संख्या को लेकर कोई निश्चित सीमा तय नहीं की गई थी।

किस तरह होती है आवेदनों की पूरी प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल फॉर्म-7 जमा कर देने मात्र से किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाता है। इस तरह के आवेदन प्राप्त होने पर संबंधित ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) सबसे पहले आपत्ति जताने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी करता है और उनके बयान दर्ज किए जाते हैं। यदि किसी ने एक से अधिक फॉर्म भरे हैं, तो प्रत्येक आवेदन के लिए अलग से बयान दर्ज किए जाते हैं। इसके बाद पूरी जांच की जाती है और जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति उठाई गई है, उसे भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है। सभी पहलुओं की जांच के बाद ही ईआरओ द्वारा अंतिम फैसला लिया जाता है।