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पाकुड़ के सोनारपाड़ा में डेढ़ दशक से अधिक पुरानी परंपरा, 121 वर्षों से हो रही है मां दुर्गा की पूजा

पाकुड़ के सोनारपाड़ा में डेढ़ दशक से अधिक पुरानी परंपरा, 121 वर्षों से हो रही है मां दुर्गा की पूजा

झारखंड के पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित सोनारपाड़ा गांव में दुर्गा पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है। पश्चिम बंगाल की सीमा के नजदीक बसे इस क्षेत्र के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में पिछले 121 वर्षों से अधिक समय से मां दुर्गा की आराधना की जाती रही है। यह धार्मिक स्थल स्थानीय निवासियों के बीच गहरी आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

पाकुड़ के सोनारपाड़ा में डेढ़ दशक से अधिक पुरानी परंपरा, 121 वर्षों से हो रही है मां दुर्गा की पूजा

सभी समुदायों का आपसी सहयोग

इस गांव और मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां का दुर्गा पूजाोत्सव किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि सभी संप्रदायों के लोगों का साझा पर्व है। गांव के सभी समुदाय के लोग मिलकर आपसी सौहार्द और सहयोग के साथ इस उत्सव को मनाते आ रहे हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

बंग्ला संस्कृति की छाप और वैष्णव पद्धति

पश्चिम बंगाल की सीमा के पास स्थित होने के कारण यहां की पूजा पद्धति पर बंग्ला संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। इस मंदिर में वैष्णव मत के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न होती है, जिसके तहत यहां बलि प्रथा का प्रावधान नहीं है। मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मां के चरणों में वस्त्र, सोने और चांदी के आभूषण अर्पित करते हैं। मंदिर के निर्माण और विकास में भी स्थानीय श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा है।

भक्तों की अटूट आस्था और विशेष प्रबंध

सोनारपाड़ा के इस जागृत दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होने की मान्यता है। यही कारण है कि देश के अन्य हिस्सों में आजीविका या काम के सिलसिले में रहने वाले ग्रामीण भी दुर्गा पूजा के विशेष अवसर पर माता के दर्शन के लिए यहां जरूर पहुंचते हैं। इस वर्ष पूजा के सफल संचालन के लिए सोनारपाड़ा दुर्गा पूजा कमेटी के अध्यक्ष मीठू माल, सचिव सुभाष चंद्र मंडल और कोषाध्यक्ष राजीव दत्ता की देखरेख में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।