केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज, इन नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री बीएल वर्मा को राज्यसभा का टिकट न मिलने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। इन दोनों मंत्रियों का राज्यसभा का कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को पूरा होने जा रहा है, जिसके बाद उनका मंत्रिमंडल में रहना संभव नहीं होगा। इन दोनों को यदि शामिल किया जाए, तो पिछले चार महीनों के दौरान मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या में काफी कमी आई है और कुल पांच मंत्री कम हो जाएंगे। भाजपा संगठन की नियुक्तियों और राज्यसभा के टिकट वितरण को यदि बारीकी से देखा जाए, तो मंत्रिमंडल में संगठन से जुड़े युवा नेताओं को विशेष तरजीह मिलने की पूरी उम्मीद है।

मंत्रियों के कम होने का सिलसिला और राजनीतिक समीकरण
इससे पहले जून महीने में रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हुआ था जो जुलाई के पहले हफ्ते तक खत्म हो गया था। इसके बाद उन दोनों को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान को भी मंत्रिमंडल से बाहर होना पड़ा था। इसके अलावा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उसी वक्त से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें काफी तेज हो गई थीं। हालांकि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को देखते हुए इस प्रक्रिया को उस समय टाल दिया गया था। सूत्रों की मानें तो अकाली दल के साथ गठबंधन की घोषणा जल्द हो सकती है और केवल सीटों के बंटवारे को लेकर ही मामला थोड़ा रुका हुआ है। एक बार गठबंधन की औपचारिक घोषणा होने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार कभी भी किया जा सकता है, और गठबंधन की स्थिति में उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी।
युवा और महिला चेहरों को मिल सकती है प्राथमिकता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार का यह मंत्रिमंडल फेरबदल हो सकता है, और वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में सरकार इसी मंत्रिमंडल के साथ आगे बढ़ेगी। यही मुख्य कारण है कि किसी भी तरह के फेरबदल से पहले सभी राजनीतिक समीकरणों और अपेक्षाओं को बेहद बारीकी से ध्यान में रखा जा रहा है। एक वरिष्ठ नेता ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि जिस तरह से पार्टी संगठन के पदाधिकारियों और राज्यसभा के उम्मीदवारों में संगठन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, ठीक वैसा ही रुख मंत्रिमंडल के इस फेरबदल में भी देखने को मिल सकता है। वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण के एक अहम मुद्दा बनने की पूरी संभावना है, जिसके चलते मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके साथ ही, देश के युवाओं के साथ सीधा जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश में जुटी सरकार युवा चेहरों को भी मंत्रिमंडल में प्रमुखता से तरजीह दे सकती है ताकि पार्टी का आधार और अधिक मजबूत हो सके।
