दलहन-तिलहन किसानों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम, एमएसपी से भाव गिरने पर सीधे मंडियों में होगी खरीद
केंद्र सरकार ने देश के दलहन और तिलहन किसानों को बड़ी राहत देते हुए खरीद व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब बाजार में इन फसलों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी से नीचे आते ही सरकारी एजेंसियां बिना किसी विलंब के सीधे मंडियों में उतरकर किसानों से फसल खरीदना शुरू कर देंगी। इस नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य किसानों को वित्तीय नुकसान से बचाना और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है।

खरीद प्रक्रिया में बदलाव और एजेंसियों की भूमिका
पारंपरिक व्यवस्था के तहत पीएम-आशा योजना की मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत राज्यों के अनुरोध के बाद ही केंद्रीय एजेंसियां खरीद प्रक्रिया शुरू करती थीं। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण कई बार किसानों को कम कीमतों पर अपनी उपज बेचनी पड़ती थी। अब इस अंतराल को समाप्त करने के लिए नेफेड और एनसीसीएफ को निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्यों के औपचारिक अनुरोध का इंतजार किए बिना ही बाजार कीमतों पर कड़ी नजर रखें।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन फसलों के दाम एमएसपी से नीचे लुढ़क सकते हैं, उनके लिए जिला स्तर पर उत्पादन, मंडी आवक और भंडारण क्षमता का आकलन समय रहते पूरा कर लिया जाए। इससे फसल मंडियों में पहुंचते ही बिना किसी रुकावट के खरीद के पुख्ता इंतजाम किए जा सकेंगी।
फसल विविधीकरण और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
धान और गेहूं की तुलना में दलहन और तिलहन फसलों के लिए सरकारी खरीद का दायरा और नेटवर्क सीमित है। मंडियों में एक साथ बड़ी मात्रा में फसल आने से कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे किसानों को मजबूरी में कम भाव स्वीकार करने पड़ते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सहकारी समितियों और नए खरीद केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है।
सरकार का यह भी लक्ष्य है कि वर्ष 2030-31 तक देश को दलहन उत्पादन के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसके साथ ही तूर, उड़द और मसूर की पूरी उपज खरीदने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जबकि तिलहन के मामलों में मूल्य अंतर भुगतान का विकल्प भी किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि उन्हें उचित लाभ मिल सके।
