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रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए भारत ने तेज किए कूटनीतिक प्रयास

रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए भारत ने तेज किए कूटनीतिक प्रयास

भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी कूटनीतिक कोशिशों को तेज करते हुए मॉस्को और कीव दोनों पक्षों के साथ संवाद स्थापित किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि नई दिल्ली इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए भारत ने तेज किए कूटनीतिक प्रयास

कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर

विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि भारत केवल कूटनीति की पैरवी करने से आगे बढ़कर अब व्यावहारिक स्तर पर सहायता करने में जुट गया है। इन प्रयासों के तहत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा, अनाज के सुचारू निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी तात्कालिक चिंताओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। भारत का यह रुख दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध

म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान विदेश मंत्री ने रूस के साथ देश के पुराने और मजबूत रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछली सदी के छठे दशक से ही दोनों देशों के संबंध बेहद अच्छे रहे हैं और जब भी भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर संकट आया, तब तत्कालीन सोवियत संघ ने हरसंभव सहयोग किया था। आज के समय में यह साझेदारी रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और व्यापारिक स्तर पर काफी आगे बढ़ चुकी है।

वैश्विक भू-राजनीति और मध्यम शक्तियों की भूमिका

वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने अमेरिका की बदलती नीतियों और चीन के बढ़ते प्रभाव को मुख्य कारक बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के समाधान के लिए केवल पारंपरिक महाशक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय मध्यम और उभरती हुई ताकतों को आपूर्ति श्रृंखला, उच्च तकनीक विनिर्माण, जलवायु परिवर्तन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करना चाहिए।