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भारतीय केमिकल सेक्टर में सुधार की शुरुआत, पूंजी पर रिटर्न में लग सकते हैं दो से तीन साल

भारतीय केमिकल सेक्टर में सुधार की शुरुआत, पूंजी पर रिटर्न में लग सकते हैं दो से तीन साल

भारतीय केमिकल सेक्टर ने पिछले कुछ वर्षों की मंदी से बाहर निकलना शुरू कर दिया है, हालांकि कंपनियों को अपनी बढ़ी हुई उत्पादन क्षमताओं का पूरा उपयोग करने और पूंजी पर रिटर्न को बेहतर बनाने में अभी दो से तीन साल का वक्त और लग सकता है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग अब सुधार की राह पर आगे बढ़ रहा है और कंपनियों की आय में भी इसके शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं।

भारतीय केमिकल सेक्टर में सुधार की शुरुआत, पूंजी पर रिटर्न में लग सकते हैं दो से तीन साल

मुनाफे में सुधार लेकिन पूंजी रिटर्न में देरी

रिपोर्ट के अनुसार, केमिकल कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन में सुधार तो नजर आ रहा है, लेकिन पूंजी पर रिटर्न (रिटर्न ऑन कैपिटल) में सुधार आने में थोड़ा समय लगेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में जो बड़े पैमाने पर निवेश किए गए थे, वे अभी पूरी तरह से आमदनी में योगदान नहीं दे पा रहे हैं। आने वाले दो से तीन वर्षों में जैसे-जैसे नए कारखाने अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू करेंगे, इस स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

तिमाही नतीजों और आय में तेजी

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इस सेक्टर के रिकवरी के संकेत अधिक स्पष्ट हुए हैं। सूचीबद्ध केमिकल कंपनियों के राजस्व में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है और अधिकांश कंपनियों ने सकारात्मक कारोबार दिखाया है। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस सुधार का एक हिस्सा कच्चे तेल की कीमतों और मालभाड़े में बदलाव से जुड़ा हुआ है, न कि केवल मांग में भारी उछाल से। एग्रोकेमिकल्स जैसे बड़े उप-क्षेत्रों में अभी भी राजस्व के मोर्चे पर सुस्ती बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) एक महत्वपूर्ण पैमाना रहेगी।

क्षमता का कम उपयोग और भविष्य की मांग

उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले किए गए भारी निवेश के तहत तैयार की गई उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग करना है। स्थापित स्पेशलिटी केमिकल संयंत्र फिलहाल मध्यम स्तर पर काम कर रहे हैं, जबकि नए शुरू किए गए कारखाने बेहद कम क्षमता पर चल रहे हैं। ये संयंत्र कितनी तेजी से अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग करते हैं, इसी बात पर सेक्टर के रिटर्न की रिकवरी निर्भर करेगी।

लंबी अवधि के लिए मांग के लिहाज से भारतीय बाजार मजबूत बना हुआ है। स्पेशलिटी केमिकल्स का घरेलू बाजार आने वाले वर्षों में अच्छी दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो वैश्विक औसत से भी तेज गति दिखा सकता है। भारी पूंजीगत खर्च का दौर अब पीछे छूट चुका है और आने वाले समय में बेहतर क्षमता उपयोग, घरेलू मांग और आयात प्रतिस्थापन जैसे कारक इस उद्योग के विकास को नई दिशा देंगे।