सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर जताई कड़ी नाराजगी, कही बड़ी बात
सुप्रीम कोर्ट ने घर में घुसकर मारपीट और छेड़छाड़ से जुड़े एक मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बेहतर होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को भंग कर दिया जाए और इसके सभी मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी जाए।

बुलंदशहर के मामले पर हुई सुनवाई
यह तीखी टिप्पणियां न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने बुलंदशहर जिले से जुड़े छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा था कि संदिग्ध को घटनास्थल पर ही पकड़कर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया था, इसके बावजूद पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अदालत ने राज्य पुलिस के रवैये पर असंतोष जताते हुए सवाल किया कि जब आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया था, तो एफआईआर में अज्ञात का जिक्र क्यों किया गया। पीठ ने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली से आम जनता का पुलिस पर से भरोसा उठ जाता है। सुनवाई के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि जब शिकायत सुबह दर्ज कराई गई थी, तो रिकॉर्ड में उसका समय रात नौ बजे का दिखाया गया तथा जब्त की गई मोटरसाइकिल के नंबर प्लेट को लेकर भी गड़बड़ी की गई।
थाना अध्यक्ष को रहना होगा पेश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे को असंतोषजनक करार दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि मामले में नया हलफनामा दाखिल किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि नामजद आरोपी होने के बावजूद एफआईआर में अज्ञात क्यों लिखा गया। साथ ही, अदालत ने संबंधित थाना अध्यक्ष को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया है।
