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ऊधम सिंह नगर में फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण: दो पटवारी निलंबित

ऊधम सिंह नगर में फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण: दो पटवारी निलंबित

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्थायी निवास, जाति तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र तैयार किए जाने के प्रकरणों में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बाजपुर और गदरपुर तहसील क्षेत्रों के अंतर्गत अभिलेखों के सत्यापन के दौरान शुरुआती स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर दो राजस्व उप निरीक्षकों (पटवारियों) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उच्चाधिकारियों की संस्तुति और जांच रिपोर्टों के आधार पर अमल में लाई गई है।

ऊधम सिंह नगर में फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण: दो पटवारी निलंबित

बाजपुर तहसील में फर्जी जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र मामला

बाजपुर क्षेत्र में एसडीएम ऋचा सिंह द्वारा कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से बनाए गए स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों का मामला पकड़ा गया था। जांच के उपरांत इन फर्जी प्रमाणपत्रों को निरस्त कर दिया गया। इस सिलसिले में बरहैनी क्षेत्र के लेखपाल की शिकायत पर नगर पंचायत बरखेड़ा के अध्यक्ष श्याम बिहारी समेत कुल नौ व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिनमें से पांच नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

बिरिया पटवारी सर्किल में कूटरचित दस्तावेजों के जरिए पांच प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया के निर्देशों पर संबंधित पटवारी से जवाब तलब किया गया। संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर बिरिया क्षेत्र के पटवारी मोहम्मद अजमल खान को उत्तराखंड राजस्व उप निरीक्षक सेवा नियमावली के तहत निलंबित कर दिया गया।

ऊधम सिंह नगर में फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण: दो पटवारी निलंबित

गदरपुर में एमबीबीएस प्रवेश से जुड़ा मामला

गदरपुर तहसील क्षेत्र में एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े प्रकरण में भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गोविंदपुर क्षेत्र के राजस्व उप निरीक्षक सरताज अली को दस्तावेजों के सत्यापन में प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने का दोषी माना गया। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट और एसडीएम की संस्तुति मिलने के बाद जिलाधिकारी द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के पश्चात उन्हें गोविंदपुर क्षेत्र से हटाकर तहसील मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

इन दो अलग-अलग तहसीलों में प्रशासनिक कार्रवाई से राजस्व विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है। इस पूरी कार्रवाई से साफ जाहिर होता है कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन और उन्हें जारी करने में किसी भी प्रकार की कोताही को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है। इन मामलों में आगे की कानूनी और विधिक प्रक्रिया जांच के आधार पर जारी रहेगी।