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खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल: स्वास्थ्य सुरक्षा और हमारी खाद्य व्यवस्था

खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल: स्वास्थ्य सुरक्षा और हमारी खाद्य व्यवस्था

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के सामने स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत अत्यधिक चीनी, नमक या वसा वाले उत्पादों पर लाल षट्कोण में चेतावनी अंकित करने की बात कही गई है ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल: स्वास्थ्य सुरक्षा और हमारी खाद्य व्यवस्था

उपभोक्ता अधिकार और फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग की जरूरत

वर्तमान समय में पैकेट के सामने बड़े अक्षरों में स्वास्थ्यवर्धक होने के दावे लिखे होते हैं, जबकि हानिकारक तत्वों की जानकारी पीछे छोटे अक्षरों में छिपी रहती है। आम ग्राहक के लिए पोषण तालिका को समझना कठिन होता है। कनाडा, चिली और मैक्सिको जैसे देशों में स्पष्ट प्रतीक अनिवार्य किए जा चुके हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। हालांकि, मौजूदा प्रस्ताव में कुछ कमियां भी हैं, जैसे कि चेतावनी लागू होने के लिए दो पोषक तत्वों का सीमा से अधिक होना जरूरी बताया गया है, जबकि नियम हर एक तत्व के आधार पर स्वतंत्र रूप से लागू होना चाहिए।

खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल: स्वास्थ्य सुरक्षा और हमारी खाद्य व्यवस्था

केवल लेबल नहीं, संपूर्ण खाद्य सुधार की आवश्यकता

चेतावनी लेबल को मोटापे और अस्वस्थ खान-पान की समस्या का एकमात्र समाधान नहीं माना जा सकता है। भोजन का चुनाव विज्ञापन, कीमत, स्वाद और सामाजिक परिवेश से भी तय होता है। इसलिए केवल उपभोक्ता पर पूरी जिम्मेदारी डालने के बजाय विज्ञापनों पर कड़े नियम, स्कूलों के पास स्वस्थ भोजन की उपलब्धता और कर जैसे नीतिगत उपाय भी जरूरी हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े इन मामलों को लंबे समय तक विचार-विमर्श में अटकाने के बजाय इन्हें मजबूती और स्पष्टता के साथ लागू किया जाना चाहिए ताकि एक बेहतर और स्वस्थ व्यवस्था बन सके।