सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर समय-सीमा तय करने का निर्देश दिया
तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे गुटीय विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मामले का समाधान जल्द करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस बात की जानकारी दे कि इस विवाद का निपटारा कब तक कर लिया जाएगा। ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आयोग को सोमवार तक का समय दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले का समाधान कब तक किया जा सकता है।

शिवसेना विवाद का भी किया गया जिक्र
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दोनों गुटों के बीच चल रहे इस विवाद का निपटारा जल्द से जल्द होना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पिछली स्थिति का हवाला देते हुए शिवसेना के गुटीय विवाद का भी विशेष रूप से जिक्र किया, जिसमें दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर इसी प्रकार का विवाद खड़ा हुआ था।
अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न का आवंटन
पार्टी के दोनों गुटों के बीच चल रहे मतभेदों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी नाम और प्रतीक आवंटित किए गए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अस्थायी रूप से ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, अरूप रॉय वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न प्रदान किया गया है।
पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव
राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों से ठीक पहले पार्टी के भीतर यह घमासान मचा हुआ है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव आगामी 6 अक्टूबर को निर्धारित किए गए हैं, और इन उपचुनावों के परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव से ठीक पहले पार्टी की पहचान और प्रतीक को लेकर खड़े हुए इस राजनीतिक संकट के समाधान के लिए अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
