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पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से तेल कंपनियों को भारी घाटा

पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से तेल कंपनियों को भारी घाटा

पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल के चलते देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव बन गया है। रेटिंग एजेंसी इक्रा की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी घाटा हो रहा है।

पश्चिम एशिया संकट का असर: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से तेल कंपनियों को भारी घाटा

पेट्रोल और डीजल पर नुकसान की स्थिति

इक्रा की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख सरकारी कंपनियों को वर्तमान में पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 9 रुपये का घाटा सहन करना पड़ रहा है। इसके अलावा, घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर भी अंडर-रिकवरी लगभग 300 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई है। इन सभी कारणों से इन कंपनियों को रोजाना कुल मिलाकर लगभग 530 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है।

कच्चे तेल की आयात कीमतों में बढ़ोतरी

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत द्वारा खरीदे जाने वाले कच्चे तेल की बास्केट का मूल्य बढ़कर काफी ऊंचा हो गया है। सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में यह कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दर्ज की गई, जबकि इससे पिछले वित्तीय वर्ष में औसत आयात मूल्य काफी कम था। पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं और कई हफ्तों से यह 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे के आसपास ही घूम रही हैं।

रिफाइनिंग मार्जिन और सरकारी सहायता पर नजर

हालांकि इन कंपनियों के लिए सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन की स्थिति कुछ हद तक बेहतर बनी हुई है और यह 10 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है, लेकिन ऊंचे दाम पर कच्चा तेल खरीदकर उत्पाद कम दरों पर बेचने के कारण कंपनियों की लाभप्रदता और नकदी प्रवाह पर गहरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंपनियों का भविष्य का वित्तीय प्रदर्शन इस बात पर भी निर्भर करेगा कि केंद्र सरकार की ओर से इन्हें किस प्रकार की वित्तीय मदद मिलती है।