उत्तराखंड में भू-ऊर्जा को बढ़ावा देने की तैयारी, लद्दाख और आइसलैंड भेजे जाएंगे अध्ययन दल
उत्तराखंड ऊर्जा विभाग राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भू-तापीय झरनों को स्वच्छ ऊर्जा के एक संभावित स्रोत के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। तपोवन भू-तापीय स्थल पर प्रारंभिक अध्ययन पूरा हो चुका है और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए कर्मचारियों को लद्दाख तथा आइसलैंड भेजने की योजना है।

उत्तराखंड भू-तापीय ऊर्जा नीति-2025
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा जुलाई 2025 में उत्तराखंड भू-तापीय ऊर्जा नीति को मंजूरी दी गई थी। तपोवन स्थल पर प्रारंभिक परीक्षण सफल रहने के बाद, उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) को यहां प्रायोगिक ड्रिलिंग शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, इस दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया अंतिम चरण में है और ओएनजीसी तथा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के प्रतिनिधियों के साथ एक कार्य समूह का गठन किया गया है।
वाडिया संस्थान के अध्ययन और भू-तापीय स्रोत
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में लगभग 40 भू-तापीय झरने चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से आधे गढ़वाल क्षेत्र और आधे कुमाऊं के उच्च हिमालयी हिस्सों में स्थित हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन उथले स्रोतों का उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका उपयोग अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। तपोवन के गर्म पानी के झरने का अध्ययन दशकों पहले भी किया जा चुका है, लेकिन आधुनिक तकनीकों और कम तापमान वाले टर्बाइन आने के बाद इस क्षेत्र में रुचि फिर से बढ़ी है।

लद्दाख और आइसलैंड से तकनीकी सीख
भू-तापीय ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को आइसलैंड भेजने का निर्णय लिया गया है। आइसलैंड अपनी कुल बिजली का एक बड़ा हिस्सा भू-तापीय संयंत्रों से प्राप्त करता है और अपने अधिकांश घरों को गर्म रखने के लिए इसी ऊर्जा का उपयोग करता है। इसके अलावा, लद्दाख की पुगा घाटी में चल रहे भू-तापीय विकास कार्यों का अध्ययन करने के लिए अक्टूबर के बाद एक तकनीकी दल वहां का दौरा करेगा।
नीति के प्रमुख बिंदु
नई नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, पर्यावरण और आर्थिक संभावनाओं का आकलन करना तथा बिजली उत्पादन, कूलिंग और हीटिंग जैसे कार्यों में भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग सुनिश्चित करना है। नीति के नियमों के तहत सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों को पारदर्शी तरीके से परियोजनाएं आवंटित की जाएंगी, जिसके लिए एक वर्ष के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य होगा। सरकार ने अन्वेषण कार्यों के लिए वित्तीय सहायता और एकल खिड़की प्रणाली का प्रावधान भी किया है।
