2024 की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई
देहरादून, । चार धाम यात्रा 2025 के पहले तीन सप्ताहों में पिछले वर्ष 2024 की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट यात्रा के पहले सप्ताह से ही शुरू हो गई थी और पिछले तीन सप्ताहों से लगातार जारी है। देहरादून स्थित उत्तराखंड के पर्यावरण और क्लाइमेट के मुद्दों की डाटा बेस्ड एडवोकेसी पर काम करने वाली संस्था, सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज (एसडीसी) फाउंडेशन के विश्लेषण के अनुसार, 30 अप्रैल से 20 मई 2025 के बीच कुल 10,91,406 श्रद्धालु चार धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ पहुंचे। जबकि 10 मई से 30 मई 2024 के बीच यह संख्या 13,84,688 थी। यानी कुल 2,93,282 श्रद्धालु कम पहुंचे, जो कि 21ः की गिरावट को दर्शाता है।
एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने कहा, “इस साल यात्रा की शुरुआत से ही गिरावट देखी जा रही है, और तीनों सप्ताहों में यह सिलसिला जारी रहा है। जहां दूसरे सप्ताह में भारत-पाक तनाव का असर देखने को मिला, वहीं पिछले साल के रुझानों के आधार पर यह उम्मीद थी कि 15 मई के बाद श्रद्धालु संख्या में तेजी आएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।” फाउंडेशन के विश्लेषण के अनुसार, पिछले वर्ष 14 से 20 मई और इस वर्ष 14 से 20 मई के दौरान यमुनोत्री में 27ः, केदारनाथ में 26 प्रतिशत और गंगोत्री में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि में केवल बद्रीनाथ में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण 12 वर्षों बाद आयोजित हो रहा पुष्कर कुंभ मेला है। एसडीसी फाउंडेशन बीते कई समय से चार धाम यात्रा पर आधारित आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण करता रहा है। वर्ष 2024 में, फाउंडेशन ने ‘उत्तराखंड चार धाम यात्रा 2024रू डाटा इनसाइट्स, चैलेंजेज एंड ऑप्पोरटुनिटीज शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसे तत्कालीन मुख्य सचिव को सौंपा गया था। इस रिपोर्ट में भीड़ प्रबंधन, पारिस्थितिकी सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और केरिंग कैपेसिटी के आधार पर हर धाम पर प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की सीमा तय करने जैसे कई सुझाव शामिल थे। रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गई थी कि पंजीकरण प्रणाली को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाया जाए, जो अक्सर जटिलता और अव्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं और यात्रा प्रबंधकों दोनों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनती है। अनूप नौटियाल ने कहा, “हमने राज्य सरकार को हमेशा डेटा, रुझानों और अनुभवों के आधार पर रचनात्मक सुझाव दिए हैं। मौजूदा हालात एक बार फिर यह जरूरत दर्शाते हैं कि इन सिफारिशों को संस्थागत रूप दिया जाए और यात्रा प्रबंधन को सुगम बनाते हुए वर्तमान जलवायु और आपदा की चुनौतियों के अनुरूप प्लान और संचालित किया जाए।”

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